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आईबीएफ व एयरटेल डिजिटल टीवी भी बने टैरिफ वृद्धि वापस लेने के मामले में पक्षकार

मुंबई: दूरसंचार विवाद निपटान व अपीलीय ट्राइब्यूनल (टीडीसैट) ने इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन (आईबीएफ) और डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच) ऑपरेटर भारती टेलिमीडिया (एयरटेल डिजिटल टीवी) को उस मामले में पक्षकार बनने की अनुमति दे दी है जिसमें भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) द्वारा प्रस्तावित 27.5 टैरिफ वृद्धि को वापस लेने के फैसले को चुनौती दी गई है।

पिछली सुनवाई में, आईबीएफ ने इस मामले में अभियोजक या पक्षकार बनने के लिए याचिका दायर की थी।

अब एयरटेल डिजिटल टीवी भी इस मामले में अभियोजित किए जाने के लिए जुड़ गया था।

ट्राई के वकील कीर्तिमान  सिंह और ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज़ लिमिटेड (ज़ेडईईएल) के वकील यू ठाकुर को अपने अधिकारों व दलीलों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना उनके हस्तक्षेप पर कोई आपत्ति नहीं थी। इस मामले में ट्राई प्रतिवादी है जबकि ज़ेडईईएल इस मामले में याचिकाकर्ता है।

हस्तक्षेप करने वालों को 28 नवंबर से दो सप्ताह के भीतर अपने वाद दायर करने और दूसरे पक्ष से उसके बाद दो सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया गया है।

इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 6 जनवरी रखी गई है। इससे पहले, इस मामले में 7 दिसंबर को सुनवाई होनी थी।

मालूम हो कि ट्राई ने गैर-एड्रेसेबल सिस्टम के इलाकों के लिए प्रस्तावित 27.5 प्रतिशत टैरिफ वृद्धि तब वापस ले ली थी, जब सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2015 में उसके इस फैसले के खिलाफ आए टीडीसैट के आदेश पर स्टे देने में मना कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने ट्राई को नया टैरिफ आदेश लाने को कहा। साथ ही डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्मों से कहा था कि वे ब्रॉडकास्टरों से तब तक रिफंड न मांगें, जब तक ट्राई नया टैरिफ आदेश लेकर नहीं आ जाता।

ब्रॉडकास्टरों की शिकायत रही है कि ट्राई ने टैरिफ वृद्धि को वापस लेने से पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने हुए नए सिरे से टैरिफ तय करने की कोई कोशिश नहीं की।

इससे पहले टीडीसैट ने दो किश्तों में मुद्रास्फीति संबंधी टैरिफ वृद्धि करने के ट्राई के आदेश को दरकिनार कर दिया था। उसका कहना था कि डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (डैस) के इलाकों में जो समझौते किए जा रहे हैं, उनकी दर गैर-कंडीशनल एक्सेस सिस्टम (गैर-कैस) के इलाकों के लिए 42 प्रतिशत की सीमा से काफी ज्यादा कम है।

इस बीच ट्राइब्यूनल ने 2016 की ब्रॉडकास्टिंग अपील पर अगली सुनवाई 7 दिसंबर को रखी है। इस अपील में ब्रॉडकास्टरों ने ट्राई की प्रस्तावित दोहरी शर्तों को चुनौती दे रखी है।

ट्राई द्वारा दिसंबर 2015 में अधिसूचित की गई ‘दोहरी’ शर्तों में कहा गया है कि (ए) बुक़े में शामिल किसी पे-चैनल की अ-ला-कार्टे दर ब्रॉडकास्टर द्वारा एड्रेसेबल सिस्टम के लिए दी गई रियो (रेफरेंस इंटरकनेक्ट ऑफर) दर के दोगुने से ज्यादा नहीं होनी चाहिए; और (बी) बुक़े के सभी चैनलों की अ ला कार्टे दरों का योग बुक़े की दर के तीन गुने से ज्यादा नहीं होगा।

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