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मुद्रास्फीति संबंधी टैरिफ वृद्धि के मामले में आईबीएफ ने भी टीडीसैट में पक्ष बनने की अर्जी लगाई

मुंबई: स्टार इंडिया के बाद, इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन (आईबीएफ) ने भी गैर-एड्रेसेबल सिस्टम के इलाकों में मुद्रास्फीति से जुड़ी 27.5 प्रतिशत टैरिफ वृद्धि को वापस लेने के भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के निर्णय के खिलाफ चल रहे मामले में खुद को अभियोजित कर रहा है।

आईबीएफ के वकील नितिन भाटिया ने कहा है कि वे आईबीएफ की ओर से अभियोजन के लिए आवेदन दाखिल करेंगे। दूरसंचार विवाद निपटान व अपीलीय ट्राइब्यूनल (टीडीसैट) ने उन्हें ऐसा करने के लिए अनुमति दी है और एक सप्ताह के भीतर वाद-विवाद दायर करने के लिए उसे अनुमति दी है। उसका जवाब इसे दाखिल करने की तारीख से दस दिनों के भीतर दायर किया जा सकता है।

इससे पहले, स्टार इंडिया ने ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ज़ेडईईएल) द्वारा ट्राई के फैसले को चुनौती देते इस मामले में अपने आप को अभियोजित करवाया है।

इस मामले में अपने अभियोजन के बाद, स्टार इंडिया ने 5 अक्टूबर को अपने वाद-विवाद दायर किए। मामले का प्रतिवादी ट्राई 9 नवंबर से दस दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल कर सकता है।

स्टार उसके बाद एक सप्ताह के भीतर अपना पत्युत्तर दायर कर सकता है। ट्राइब्यूनल ने ज़ेडईईएल को भी एक सप्ताह के भीतर ट्राई के उत्तर पर अपना प्रत्युत्तर दायर करने की अनुमति दी है।

ट्राई के वकील कीर्तिमान सिंह ने हालांकि 2016 की ब्रॉडकास्टिंग अपील नंबर 2 में वाद दायर करने पर आपत्ति जताई। उन्हें अपना उत्तर और साथ ही दस दिनों के भीतर इसकी कानूनी वैधता पर प्रतिक्रिया दाखिल करनी है। 2016 की ब्रॉडकास्टिंग अपील नंबर 2 के माध्यम से ब्रॉडकास्टरों ने ट्राई द्वारा प्रस्तावित दोहरी शर्तों को चुनौती दी है।

ट्राई द्वारा दिसंबर 2015 में अधिसूचित की गई ‘दोहरी’ शर्तों में कहा गया है कि (ए) बुक़े में शामिल किसी पे-चैनल की अ-ला-कार्टे दर ब्रॉडकास्टर द्वारा एड्रेसेबल सिस्टम के लिए दी गई रियो (रेफरेंस इंटरकनेक्ट ऑफर) दर के दोगुने से ज्यादा नहीं होनी चाहिए; और (बी) बुक़े के सभी चैनलों की अ ला कार्टे दरों का योग बुक़े की दर के तीन गुने से ज्यादा नहीं होगा।

इस मामले की अगली सुनवाई समान विषय के अंतर्गत 7 दिसंबर को रखी गई है।

मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2015 में टीडीसैट के उस आदेश के खिलाफ स्टे देने में मना कर दिया था जिसमें उसने ट्राई द्वारा की गई मुद्रास्फीति से जुड़ी 27.5 प्रतिशत टैरिफ वृद्धि को खारिज किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने ट्राई को नया टैरिफ आदेश लाने को कहा। साथ ही डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्मों से कहा था कि वे ब्रॉडकास्टरों से तब तक पैसा वापस न मांगें, जब तक ट्राई नया टैरिफ आदेश लेकर नहीं आ जाता।

ब्रॉडकास्टरों की शिकायत है कि ट्राई ने टैरिफ वृद्धि वापस लेने से पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने हुए नए सिरे से टैरिफ तय करने की कोई कोशिश नहीं की।

इससे पहले टीडीसैट ने दो किश्तों में मुद्रास्फीति संबंधी टैरिफ वृद्धि करने के ट्राई के आदेश को दरकिनार कर दिया था। उसका कहना था कि डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (डैस) के इलाकों में जो समझौते किए जा रहे हैं, उनकी दर गैर-कंडीशनल एक्सेस सिस्टम (गैर-कैस) के इलाकों के लिए 42 प्रतिशत की सीमा से काफी ज्यादा कम है।

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