लाइव पोस्ट
चीन में शुरू हुआ दुनिया का सबसे ऊंचा पुल, 14.40 करोड़ डॉलर से बना
नोटबंदी को लेकर तृणमूल कांग्रेस का पीएम मोदी पर कटाक्ष- 'उम्मीद है कल बड़ी घोषणा करेंगे'
सीतापुर में यात्रियों से भरी बस नदी में पलटी, बचाव कार्य जारी
झारखंड में कोयला खदान के अंदर फंसे मजदूर, 10 शव निकाले गए
दिल्ली हाई कोर्ट ने शादियों के लिए बैंक खाते से 2.5 लाख रुपए निकालने के खिलाफ याचिका खारिज़ की
संसद के दोनों सदनों में नोटबंदी के खिलाफ विपक्षी दलों का हंगामा जारी
घोषित काले धन पर लगेगा 50% टैक्स, लोकसभा ने आयकर अधिनियम में संशोधन पास किया

भू-आधारित ब्रॉडकास्टरों को अलग नियामक ढांचे के तहत लाया जाना चाहिए: ट्राई

trai-logo1-105x65

भू-आधारित ब्रॉडकास्टरों की छोटी पहुंच को देखते हुए राज्य को एक इकाई माना जाना चाहिए और 15 या इससे अधिक राज्यों तक पहुंच को अखिल भारतीय उपस्थिति माना जाना चाहिए। साथ ही जो राज्य पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी) के सदस्य हैं, उन्हें एक राज्य के समतुल्य माना जा सकता है।

ट्राई ने डीपीओ द्वारा संलाचित प्लेटफॉर्म सेवाओं को नियामक ढांचे के अधीन किया

ट्राई ने एमएसओ और एलसीओ द्वारा चलाई जा रही प्लेटफॉर्म सेवाओं को नियामक ढांचे में लाने के लिए अपनी सिफारिशें जारी कर दी हैं। इसके दायरे में डीटीएच, आईपीटीवी व हिट्स जैसे अन्य डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटरों को भी ले आया गया है। ट्राई से अपनी सिफारिशें सरकार को सौंप दी हैं।

डीपीओ को पीएस चैनल सूचना व प्रसारण मंत्रालय के पास पंजीकृत कराने होंगे: ट्राई

tdsat-logo03

वैसे तो ट्राई की सिफारिश है कि पीएस चैनलों से कोई सालाना फीस न ली जाए। लेकिन उसका सुझाव है कि एक बार की पंजीकरण फीस के बतौर प्रति पीएस चैनल 1000 रुपए लिए जाने चाहिए।

ट्राई ने केबल व डीटीएच द्वारा दिखाए जाने वाले प्लेटफॉर्म सेवा चैनलों की संख्या बांधी

tdsat-logo03

ट्राई की सिफारिश है कि डैस के इलाकों में डीपीओ ज्यादा से ज्यादा 15 पीएस चैनल पेश कर सकते हैं। वहीं गैर-डैस इलाकों में यह संख्या अधिकतम पांच तक जा सकती है।

केबल नेटवर्क स्थानीय मसलों के चैनल चला सकते हैं, एफडीआई घटाने की ज़रूरत नहीं: ट्राई

tdsat-logo02

केबल ऑपरेटरों को स्थानीय मामलों के चैनल चलाने के लिए अनुमति देते हुए ट्राई ने साफ किया कि वे राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ का ट्रांसमिशन नहीं कर सकते। ट्राई ने यह भी सिफारिश की कि उन्हें सैटेलाइट न्यूज़ ब्रॉडकास्टरों की तरह एफडीआई को कम करने की कोई ज़रूरत नहीं है।