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स्टार ने टीडीसैट के रियो आदेश को चुनौती दी, दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

मुंबई: रेफरेंस इंटरकनेक्ट ऑफर (रियो) पर कानूनी लड़ाई शुरू हो चुकी है। किसी भी बातचीत के लिए रियो को प्रारंभिक बिंदु बनाने के टीडीसैट के आदेश को चुनौती देती स्टार इंडिया की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है।

आदेश सुरक्षित रखते हुए जस्टिस राजीव सहाय एंडलॉ ने दूरसंचार विवाद निपटान व अपीलीय ट्राइब्यूनल (टीडीसैट) से अनुरोध किया कि वो भी 12 जनवरी 2016 को निर्धारित सुनवाई को तीन सप्ताह के बाद की तारीख तक खिसका दे।

याचिका पर गौर कर रही बेंच ने विशेष रूप से भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) अधिनियम, 1997 की धारा 18 के तहत याचिका की स्वीकार्यता के पहलू पर सभी पक्षों की बात सुनी।

ब्रॉडकास्टरों द्वारा ऐसा कदम उठाने की आशंका को देखते हुए टीडीसैट में याचिकाकर्ता रहे नोएडा सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क लिमिटेड (एनएसटीपीएल) ने पहले ही अदालत में एक कैविअट – विरोध पत्र दाखिल कर रखा है। कई अन्य ब्रॉडकास्टरों ने इस मामले में स्टार का समर्थन किया है।

मालूम हो ट्राइब्यूनल ने फैसला सुनाया था कि ब्रॉडकास्टरों और टीवी चैनलों के डिस्ट्रीब्यूटरों के बीच किसी भी वार्ता का शुरुआती बिंदु रेफरेंस इंटरकनेक्ट ऑफर या रियो होगा।

आदेश में यह भी कहा गया था कि हेडएंड-इन-द-स्काई (हिट्स) ऑपरेटर, राष्ट्रीय मल्टी-सिस्टम ऑपरेटर (एमएसओ) जैसे ही हैं और इसलिए उन पर भी इंटरकनेक्शन समझौते की वही व्यावसायिक शर्तें लागू होंगी जो किसी राष्ट्रीय एमएसओ पर लागू होती हैं।

साथ ही ­टीडीसैट ने कहा था कि रियो में चैनलों नहीं, विभिन्न बुक़े की दरें भी झलकनी चाहिए जिनमें ब्रॉडकास्टर अपने चैनलों को डिस्ट्रीब्यूशन के लिए पेश करना चाहता है। इसके अलावा उसमें हर समूहन या बुक़े की दर अलग-अलग दी जानी चाहिए।

ट्राइब्यूनल के फैसले के मुताबिक, अ ला कार्टे दर और बुक़े की दर को क्लाज़ 13.2ए.12 में निर्धारित अनुपात का पालन करना चाहिए। इस क्लॉज़ में तय किया गया है कि पे-चैनलों की अ ला कार्टे दरों का जोड़ बुक़े की दर के डेढ़ गुने से ज्यादा नहीं होना चाहिए और हर पे-चैनल की अ ला कार्टे दर किसी भी सूरत में उस बुक़े के पे-चैनल की औसत दर की तीन गुनी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

ट्राइब्यूनल ने यह भी कहा था कि रियो में ऐसी किसी भी बल्क डिस्काउंट स्कीम अथवा क्षेत्रीय, सांस्कृतिक या भाषायी आधार पर दी जा रही किसी विशेष स्कीम का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए जो सिग्नल पाने के इच्छुक सभी लोगों को बगैर किसी भेदभाव के दी जाएंगी।

टीडीसैट के आदेश में कहा गया है कि रियो में ब्रॉडकास्टर किसी डिस्ट्रीब्यूटर के साथ बातचीत के जरिए समझौता कर सके वैसे सारे फॉर्मैट और संबंधित कीमतों को शामिल किया जाना चाहिए।

टीडीसैट के फैसले का मुख्य अभिप्राय यह है कि क्लॉज़ या खण्ड 13.2ए.12 के तहत निर्धारित अनुपात के साथ तालमेल में समझौतों के टेम्पलेट और उसकी कीमतें अगर रियो में नहीं दी गई हैं तो ब्रॉडकास्टर किसी डिस्ट्रीब्यूटर के साथ किसी भी तरह की बातचीत के जरिए समझौता नहीं कर सकता है।