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टीडीसैट का आदेश, बकाया चुकाने पर डेन के सिग्नल न काटे ताज टेलिविज़न

मुंबई: दूरसंचार विवाद निपटान व अपीलीय ट्राइब्यूनल (टीडीसैट) ने ताज टेलिविज़न को निर्देश दिया है कि वो अगली सुनवाई तक डेन नेटवर्क्स और उसकी सब्सिडियरी कंपनियों के सिग्नल न काटे, बशर्ते वे इस दौरान डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (डैस) और गैर-डैस इलाकों की बकाया रकम 13.11 करोड़ रुपए अदा कर देती हैं।

डेन को डैस के इलाकों के लिए अगस्त महीने का 9.74 करोड़ रुपए और गैर-डैस इलाकों के लिए सितंबर महीने का 3.36 करोड़ रुपए का भुगतान करना था। ये भुगतान 30 नवंबर कर दिए जाने थे।

ट्राइब्यूनल ने यह भी साफ किया कि ये भुगतान ऑन-एकाउंट पेमेंट्स हैं और इन्हें दोनों पक्षों के अधिकारों व झगड़ों के किसी पूर्वाग्रह के बिना अदा किया जाना है।

उसने  यह भी कहा कि अगर किसी भी भुगतान में समझौते की शर्तों के हिसाब से देरी हुई तो एमएसओ को ट्राइब्यूनल द्वारा निर्धारित किए जानेवाला ब्याज अदा करना पड़ेगा।

मामले पर अगले आदेश के लिए 8 दिसंबर को सुनवाई होनी है।

ताज टेलिविज़न ने दावा किया है कि अक्टूबर 2015 तक डैस के इलाकों और नवंबर 2015 तक गैर-डैस इलाकों की बिलिंग को मिला दिया जाए तो उसका कुल बकाया 17 नवंबर को 42.03 करोड़ रुपए का बनता है।

इस रकम में वो 6.63 करोड़ रुपए शामिल हैं जो एमएसओ के अनुसार विवादित हैं। लेकिन डिस्ट्रीब्यूटर के मुताबिक इसे एमएसओ द्वारा देय के रूप में स्वीकार किया गया है।

बकाया राशि में डैस के इलाकों के लिए अगस्त 2015 माह के 9.74 करोड़ रुपए और सितंबर 2015 माह के 10.11 करोड़ रुपए की बिलिंग शामिल है।

इसमें गैर-डैस इलाकों के लिए अक्टूबर 2015 के 3.36 करोड़ रुपए और नवंबर 2015 के 2.42 करोड़ रुपए की बिलिंग और डैस के इलाकों के लिए अक्टूबर 2015 का 9.75 करोड़ रुपए का अनंतिम भुगतान भी शामिल है।

डेन के वकील नवीन चावला ने कहा कि डैस और गैर-डैस दोनों ही इलाकों के लिए दोनों पक्षों के बीच सहमति हुई थी कि भुगतान की तारीख से 60 दिनों की क्रेडिट अवधि रहेगी जिसका जिक्र इनवॉयस में भी किया गया है। लेकिन इस दावे का पुरजोर विरोध ताज टेलिविज़न के वकील अमन लेखी द्वारा किया गया।

लेखी का कहना था कि दोनों पक्षों के बीच किए गए करार में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है और वो 31 मार्च को समाप्त भी हो चुका है। उन्होंने कहा कि डेन के वकील जिस संदेश का जिक्र कर रहे हैं वो उससे पहले की तारीख का है।

वहीं चावला के अनुसार, जिस संदेश में इन शर्तों का उल्लेख किया गया है वो ताज टेलिविज़न के सीईओ द्वारा 6 फरवरी को जारी किया गया था और उस करार पर दस्तखत किए जाने के पहले का था जिसे 2 मार्च को अपनाया गया।

ट्राइब्यूनल ने कहा कि डिस्ट्रीब्यूटर ने जिस पत्र का उल्लेख किया है, उसमें मुख्य सहमति ‘उसी महीने’ भुगतान की मानक शर्त है। लेकिन साथ ही कहा गया है कि एक अलग पत्र दिया जाएगा जिसमें डेन को अपवादस्वरूप 60 दिन की क्रेडिट की इजाजत दी जाएगी।

लेखी का कहना था कि यह सहमति बाद की है और इसमें कोई प्रावधान नहीं है कि क्रेडिट ही दोनों पक्षों को बांधेगा; इस ईमेल की शर्तों पर कभी कोई समझौता नहीं हुआ और डेन एडीएन व डेन अलग इकाइयां हैं और उन्होंने डिस्ट्रीब्यूटर के साथ अलग-अलग समझौते कर रखे हैं।

इस पर चावला ने ज़ोर देकर कहा कि अलग पत्र पूरे समझौते का हिस्सा था और इसेक साथ ही, 11 फरवरी के पत्र में साफ कहा गया है कि डेन के साथ करार उन्हीं नियमों व शर्तों पर होगा जो डेन एडीएन पर लागू होती हैं।