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टीडीसैट ने अमृतसर केबल ऑपरेटर बनाम फास्टवे मामले में अमीकस क्यूरी बनाया

मुंबई: दूरसंचार निपटान व अपीलीय ट्राइब्यूनल (टीडीसैट) ने अमृतसर केबल टीवी ऑपरेटर्स संघर्ष समिति और मल्टी-सिस्टम ऑपरेटर (एमएसओ) फास्टवे ट्रांसमिशन के बीच विवाद के मामले में धीमी गति पर चिंता जताते हुए वरिष्ठ वकील रामजी श्रीनिवासन को अमीकस क्यूरी नियुक्त किया है।

इस मामले ने एक गंभीर मोड़ तब ले लिया, जब जसविंदर सिंह जस्सी नाम के एक केबल ऑपरेटर ने एमएसओ पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए आत्महत्या कर ली। ट्राइब्यूनल ने इस मामले में श्रीनिवासन की सहायता के लिए वकील अभिषेक मल्होत्रा को भी ​​नियुक्त किया है।

आदेश मे यह भी कहा गया है कि श्रीनिवासन और मल्होत्रा ​​को पूर्ण जानकारी (ऑर्डर, आवेदन, दोनों पक्षों के एमए आदि, याचिका, उत्तर) उपलब्ध कराई जाए। इस मामले में अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होनी है।

ट्राइब्यूनल ने कहा कि छोटे केबल ऑपरेटरों का प्रतिनिधित्व करने वाले याचिकाकर्ता लंबी मुकदमेबाज़ी का खर्च नहीं उठा सकते और यह उनके हित में होगा कि मामला जितनी जल्दी हो सके, निपटा लिया जाए।
ट्राइब्यूनल ने अपने आदेश में कहा, “हमें लगता है कि याचिकाकर्ताओं का मामला ठीक ढ़ंग से पेश नहीं किया गया है और इसीलिए पार्टियों के वकीलों से अलग अमीकस क्यूरी की मदद वांछनीय हो जाती है।”

ट्राइब्यूनल ने उल्लेख किया कि याचिकाकर्ता अपनी इस शिकायत के साथ 11 महीने पहले आए थे कि प्रतिवादी के दबंग और दबावपूर्ण आचरण से वे बिज़नेस से बाहर होते चले जा रहे हैं। ट्राइब्यूनल ने जिस तरह से मामला आगे बढ़ रहा है उसपर अपनी अप्रसन्नता व्यक्त की।

कमिटि के वकील दिनेश रावत द्वारा मामले के मुद्दे तैयार करने को स्थगित करने के अनुरोध के बाद ट्राइब्यूनल की यह टिप्पणी आई। रावत इस मामले में एक एलसीओ और एक हेडएंड-इन-द-स्काई (हिट्स) ऑपरेटर को अभियोजक की तरह शामिल करवाना चाहते थे जबकि फास्टवे के वकील नवीन चावला मुद्दों की सूची के साथ तैयार थे।

याचिकाकर्ताओं क्यों दो और अभियोजकों को इस मामले में शामिल करवाना चाहते हैं इस पर ट्राइब्यूनल ने आश्चर्य तो व्यक्त किया पर रावत को इस आवेदन को दायर करने की अनुमति दे दी।

इस बीच, पिछले आदेश के अनुसरण में, रावत ने याचिकाकर्ताओं के सदस्यों साजन केबल नेटवर्क और भाटी केबल नेटवर्क की ओर से भुगतान के चेक चावला को सौंप दिए।