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टीडीसैट ने दिल्ली व लखनऊ के एलसीओ से डेन को प्रति एसटीबी 125 रुपए देने को कहा

मुंबई: दूरसंचार विवाद निपटान व अपीलीय ट्राइब्यूनल (टीडीसैट) ने दिल्ली और लखनऊ के स्थानीय केबल ऑपरेटरों (एलसीओ) को निर्देश दिया है कि वे मल्टी-सिस्टम ऑपरेटर (एमएसओ) डेन नेटवर्क्स को 125 रुपए प्रति सेट-टॉप बॉक्स (एसटीबी) की दर से बकाया देय का भुगतान कर दें।

ट्राइब्यूनल का यह आदेश दो अलग-अलग याचिकाओं के बाद आया है। ये याचिकाएं केबल ऑपरेटर्स वेलफेयर फेडरेशन ऑफ इंडिया (सीओडब्ल्यूएफआई) और केबल ऑपरेटर हितैशी एसोसिएशन लखनऊ (सीओएचएएल) की ओर से दायर की गई हैं।

सीओएचएएल के मामले में ट्राइब्यूनल ने एमएसओ को निर्देश दिया है कि चालान के अनुसार बकाया राशि का भुगतान, अगर सीओएचएएल से संबद्ध केबल ऑपरेटर कर दें तो उनके सिग्नल डिस्कनेक्ट न करें। यह निर्देश पार्टियों के अधिकारों और दलीलों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना दिया गया था।

सीओडब्ल्यूएफआई के मामले में, फेडरेशन ने प्रस्तुत किया था कि वह अधिकार और दलीलों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना जारी किए गए चालान का भुगतान करना जारी रखेगा। चालान के आधार पर मासिक सब्सक्रिप्शन शुल्क के भुगतान पर, एमएसओ को पैकेज को बहाल करना होगा। मामले में अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी।

फेडरेशन ने यह प्रस्तुति तब दी थी जब फेडरेशन के एक सदस्य कमल केबल नेटवर्क ने इस मामले के लंबित रहने तक डाउनग्रेड किए गए नेटवर्क पर सिग्नल की आपूर्ति की बहाली और सिग्नल की आपूर्ति जारी रखने के लिए निर्देश की मांग की थी।

लखनऊ एलसीओ से जुड़े मामले में ट्राइब्यूनल ने कहा कि इस मामले में फैसला होने की ज़रुरत है। उसने डेन को तीन सप्ताह के भीतर एसोसिएशन को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

पत्युत्तर, यदि कोई हो, दो सप्ताह के भीतर उसके बाद दायर किया जा सकता है। इस मामले को 23 नवंबर को रजिस्ट्रार की अदालत के समक्ष वाद-विवाद के पूरा होने, मुद्दें तय करने और सबूत लेने के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

DEN-new-logo-coverट्राइब्यूनल के मुताबिक, मुद्दा यह है कि क्या केबल ऑपरेटरों के एक फेडरेशन को, जिसका किसी भी डिस्ट्रीब्यूटर के साथ कोई भी अनुबंध/करार नहीं है, क्या उसका कोई भी अधिकार बनता है कि वह, उनकी ओर से एक याचिका दायर कर सके।

ट्राइब्यूनल द्वारा यह भी नोट किया गया कि कुछ अन्य प्रश्न भी उभरते हैं तब जब याचिका पर हस्ताक्षर के बिना याचिकाकर्ता एसोसिएशन के एक या एक से अधिक सदस्य हलफनामा प्रस्तुत कर देते हैं।

ट्राइब्यूनल ने एमिकस क्युरि के रूप में वरिष्ठ वकील मीत मल्होत्रा की नियुक्ति की है और उन्हें दुर्गा पूजा की छुट्टी के समय को छोड़कर, तीन सप्ताह के भीतर अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए कहा है।

इस उद्देश्य के लिए संदर्भ की शर्तें इस प्रकार हैं:

1. क्या ट्राई एक्ट 1997 की धारा 14ए के तहत एसोससिएशन के द्वारा दायर एक याचिका, जिसमें कई स्थानीय केबल ऑपरेटर शामिल हों, पोषणीय है; विशेष रूप से इस तथ्य के मद्देनज़र कि इस तरह की इकाई का ट्राई द्वारा बनाए गए इंटरकनेक्ट नियमन के तहत डिस्ट्रीब्यूटर के साथ कोई भी अनुबंध या करार नहीं है, जिसके तहत सिग्नल प्राप्त किए जा सके। (ii) यदि (i) इस सवाल का जवाब हां में हो तो फिर ये सवाल है कि क्या एसोसिएशन को किसी उपयुक्त कानून के तहत पंजीकृत होना आवश्यक है और क्या ट्राई एक्ट की धारा 14ए के तहत याचिका दायर करने से पहले, किसी भी तरह की और कानूनी और/या प्रक्रियात्मक आवश्यकताएं हैं।

2. एसोसिएशन के सदस्य क्या कोर्ट फीस अलग से भुगतान करने के लिए उत्तरदायी हैं।

3. क्या ऐसे संगठनों का एक सदस्य या कई सदस्य इस मामले के चालु होने के दौरान कानूनन बीच में निकल सकता है और ट्राइब्यूनल के समक्ष अपनी ओर से याचिका दाखिल करने और ट्राइब्यूनल के आदेश/निर्देशा का पालन करने के लिए एसोसिएशन को अधिकृत कर सकता है।

4. एक केबल ऑपरेटर या एक से अधिक केबल ऑपरेटर, जो मूल याचिका का हिस्सा नहीं थे, क्या याचिका में बाद में शामिल हो सकते हैं, और यदि हां, तो कौन-सी कानूनी/प्रक्रियात्मक आवश्यकताएं होनी चाहिए।

इसके अतिरिक्त, अमिकस क्युरी ऐसे संगठनों की ओर से दायर याचिकाओं की स्वीकार्यता पर प्रस्तुति करेंगे जिसमें एक या एक से अधिक सदस्यों का डिस्ट्रीब्यूटर के साथ किसी भी तरह का लिखित समझौता नहीं है, लेकिन उनके साथ बिज़नेस है और इसके समर्थन में चालान, सिग्नल की आपूर्ति, रसीजद की प्रतियां, आदि के रूप में सबूत मौजूद हैं।

मामला अमिकस क्युरी की प्रस्तुतियों के साथ 11 नवंबर को सुनवाई के लिए निर्धारित किया गया है।