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ट्राई ने ब्रॉडकास्टरों से 1 मार्च 2017 तक चैनलों की सूची व दाम का ब्यौरा मांगा

मुंबई: भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने ब्रॉडकास्टरों से कहा है कि वे अपने सभी फ्री-टू-एयर (एफटीए) चैनल, प्रीमियम चैनलों, पे व प्रीमियम चैनलों के अधिकतम रिटेल मूल्य (एमआरपी) के विवरण के साथ ही पे-चैनलों के बुके के चैनलों और दरों की जानकारी 1 मार्च तक उसके द्वारा जारी किए गए मसौदा टैरिफ आदेश के अनुसार प्रस्तुत कर दें।

दूरसंचार (प्रसारण और केबल सेवाएं) (आठवां) (एड्रेसेबल सिस्टम) टैरिफ आदेश, 2016, 1 अप्रैल 2017 से प्रभावी हो जाएगा। यह एड्रेसेबल सिस्टम के माध्यम से सब्सक्राइबरों के लिए टेलिविज़न प्रसारण और केबल सेवाओं पर लागू होगा।

ब्रॉडकास्टरों को उनके सभी एफटीए चैनलों के नाम, जॉनर, भाषा और जहां वे उपलब्ध हो वे प्रासंगिक भौगोलिक क्षेत्र की जानकारी देनी होगी। उन्हें उनके द्वारा दिए जा रहे पे और प्रीमियम चैनलों के भी नाम, एमआरपी, जॉनर, भाषा और भौगोलिक क्षेत्र की जानकारी भी देनी होगी। प्रत्येक बुके की लिस्ट उसके एमआरपी के साथ, सभी पे चैनलों के नाम के साथ उपलब्ध करानी होगी।

उन्होंने खुलासा करना होगा कि पे चैनल क्या पूरे देश में या केवल देश के कुछ हिस्सों में पे चैनल हैं। क्योंकि ट्राई ने ब्रॉडकास्टरों को न जॉनर की उच्चतम सीमा के भीतर विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के लिए अलग-अलग एमआरपी तय करने की सहुलियत दी है।

इसके अलावा, ब्रॉडकास्टरों को वित्तीय वर्ष की समाप्ति से 90 दिनों में प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए विज्ञापन आय की जानकारी ट्राई को देनी होगी।

ब्रॉडकास्टरों को किसी भी चैनल या बुके में परिवर्तन, इजाफा, रूपांतरण, चैनल हटा देने की जानकारी 90 दिनों के भीतर प्रदान करनी आवश्यक है।

नए टैरिफ आदेश के अनुसार, टीवी चैनल के ऑपरेटरों को उपभोक्ताओं के लिए चैनलों की एमआरपी घोषित करनी होगी। यह टैरिफ आदेश 1 अप्रैल को अस्तित्व में आ जाएगा।

ट्राई द्वारा इस मामले पर परामर्श पत्र जारी किए जाने के लगभग नौ महीने के बाद इसका मसौदा टैरिफ आया है। प्राधिकरण ने 24 अक्टूबर तक मसौदा टैरिफ आदेश पर हितधारकों से टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।

ब्रॉडकास्टर तय करेंगे उपभोक्ताओं के लिए चैनलों की कीमत

ब्रॉडकास्टर अलाकार्टे पर और बुके स्तर पर, उपभोक्ताओं के लिए उनके चैनलों कीमत तय करेंगे। उनकी सब्सक्रिप्शन आय उस पर निर्भर करेगी।

ट्राई का मानना है कि उपभोक्ताओं के लिए ब्रॉडकास्टर द्वारा एमआरपी निर्धारित करने से पे चैनलों का मूल्य निर्धारण अपने-आप विनियमित होगा, क्योंकि ऊंची कीमतों से चैनलों के ग्राहकों की संख्या कम हो जाएगी, और जिससे विज्ञापन आय प्रभावित होगी।

हालांकि, चैनलों की एमआरपी, जॉनर के लिहाज से ट्राई द्वारा निर्धारित कीमत सीमा के अधीन होगी।

प्राधिकरण ने सात जॉनरों को निर्धारित किया है जिसके तहत ब्रॉडकास्टर उनके चैनलों की कीमत तय कर सकते हैं।

जॉनर मूल्य सीमा

ट्राई द्वारा निर्धारित जॉनर सीमा के अनुसार, खेल चैनलों की सीमा 19 रुपए एमआरपी पर सबसे ऊंची है। सामान्य मनोरंजन चैनलों की सीमा 12 रुपए है। फिल्म चैनल के लिए सीमा 12 रुपए है और बच्चे और इंफोटेनमेंट चैनल की कीमत क्रमशः 7 रुपए और 9 रुपए से ऊपर नहीं रखी जा सकती। न्यूज़ चैनलों के लिए सीमा 5 रुपए है जबकि भक्ति चैनलों के लिए 3 रुपए है।

ब्रॉडकास्टरों को, अपनी वेबसाइटों पर उनके पे चैनलों की एमआरपी प्रकाशित करनी होगी, ट्राई को रिपोर्ट करना होगा और टीवी चैनलों के सभी डिस्ट्रीब्यूटरों को सूचित करना होगा। एमआरपी इलेक्ट्रॉनिक प्रोग्राम गाइड (ईपीजी) में सभी ग्राहकों को दिखनी चाहिए।

बुके का एमआरपी

ब्रॉडकास्टर अलाकार्टे आधार पर या बुके के रूप में चैनलों की पेशकश कर सकते हैं और टैक्स को छोड़कर सब्सक्राइबर द्वारा एमआरपी की घोषणा कर सकते हैं। बुके का एमआरपी बुके का हिस्सा बनने वाले अलाकार्टे पे चैनलों की एमआरपी की राशि के 85 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए।

टीवी चैनलों के डिस्ट्रीब्यूटरों के लिए 15 प्रतिशत अनुमति प्राप्त छूट

यह सुनिश्चित करने के लिए कि अलाकार्टे चैनल की कीमत उचित रखी जाए, प्राधिकरण ने 15 प्रतिशत की अधिकतम अनुमेय छूट रखी है जो एक ब्रॉडकास्टर टीवी चैनलों के डिस्ट्रीब्यूटरों को पेशकश कर सकता है।

डिस्ट्रीब्यूटर ब्रॉडकास्टर के बुके की संरचना में परिवर्तन नहीं कर सकते

ग्राहकों के लिए ब्रॉडकास्टर द्वारा पेश किए गए बुके को, बिना किसी भी परिवर्तन के टीवी चैनलों के डिस्ट्रीब्यूटरों द्वारा सब्सक्राइबरों को प्रदान करना होगा।

ट्राई ने होलसेल स्तर के टैरिफ में फोरबेयरेंस की अनुमति नहीं दी है क्योंकि पर्याप्त प्रतियोगिता नहीं है। ट्राई ने नोट किया है कि हालांकि फिलहाल 48 ब्रॉडकास्टर 275 पे चैनलों को उपलब्ध कराते हैं औऱ उनके बीच कोई प्रभावी प्रतिस्पर्धा नहीं है।

ब्रॉडकास्टर को उनकी सब्सिडियरी कंपनी या होल्डिंग कंपनी या होल्डिंग कंपनी की सब्सिडियरी कंपनी के पे चैनलों को एक साथ रखने की अनुमति दी गई है। कंपनियों के नाम पर ही इन टीवी चैनलों के लाइसेंस होने चाहिए।

चैनलों के भौगोलिक बाज़ार के मूल्य निर्धारण की अनुमति

ब्रॉडकास्टर को एक भौगोलिक बाज़ार में किसी चैनल को एफटीए और दूसरे भौगोलिक बाज़ार में उस पे चैनल के रूप में घोषणा करने की अनुमति है। प्रासंगिक भौगोलिक क्षेत्र में पे चैनलों का एमआरपी बुके उस क्षेत्र में सभी डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफार्मों के लिए एक समान होना चाहिए।

एचडी चैनल की कीमत उसके एसडी चैनल से 3 गुना से ज़्यादा नहीं

प्रीमियम चैनल फोरबेयरेंस कीमत के तहत है ही, ट्राई ने एचडी चैनल के लिए भी मूल्य सीमा भी निर्धारित की है। ब्रॉडकास्टर को अपने किसी भी चैनल को कंटेंट और फॉर्मैट की परवाह किए बिना उसे ‘प्रीमियम’ के रूप में घोषणा करने की छूट होगी।

एक एचडी चैनल की लागत, उसके एसडी चैनल की लागत से 3 गुना से अधिक नहीं होनी चाहिए। यह फॉर्म्यूला इस तथ्य से निकाला गया है कि एक एचडी चैनल 2 से 3 एसडी चैनलों की बैंडविड्थ पर कब्जा जमाता है।

बिना एसडी संस्करण वाले एचडी चैनल की कीमत

जिन एचडी चैनलों का कंटेंट अपने एसडी संस्करण से अलग है, उनकी कीमत सीमा उस जॉनर के रिटेल मूल्य सीमा के 3 गुना हो सकती है।

फिलहाल के लिए, विनियामक ने क्लोन चैनलों को अछूता छोड़ दिया है। हालांकि, उसने यह कहा है कि ब्रॉडकास्टरों या टीवी चैनलों के डिस्ट्रीब्यूटरों को एक ही बुके में मूल चैनल के साथ किसी क्लोन चैनल को बंडल नहीं करना चाहिए और उपभोक्ताओं के पास उनकी पसंदीदा भाषा का चयन करने का विकल्प होना चाहिए।