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ट्राई ने टैरिफ, इंटरकनेक्शन, क्यूओएस पर राय देने की तारीख 15 नवंबर तक बढ़ाई

मुंबई: भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने टैरिफ आदेश, इंटरकनेक्शन रेग्युलेशन और सेवा की गुणवत्ता (क्यूओएस) से संबंधित मसौदों पर टिप्पणियां भेजने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 15 नवंबर कर दी है। इस तरह उसने हितधारकों को अपनी राय भेजने के लिए लगभग तीन हफ्तों का वक्त और दे दिया है।

इस नई समय सीमा के खत्म हो जाने क बाद ट्राई टिप्पणियां देने के लिए और समय देने के किसी भी अनुरोध को नहीं स्वीकार करेगा।

ट्राई में पिछले दिनों अपनी सिफारिशों का मसौदा परामश की प्रक्रिया के दौरान हितधारकों की राय पर गंभीर विचार-विमर्श और आंतरिक विश्लेषण  के बाद जारी किया है।

प्रस्तावित विनियमय फ्रेमवर्कों पर हितधारकों को राय देने का एक और मौका देते हुए नियामक संस्था ने पहले उनसे कहा था कि वे टैरिफ आदेश, क्यूओएस विनियमन और इंटरकनेक्शन विनियमन के अलग-अलग मसौदों पर अपनी टिप्पणियां क्रमशः 24, 25 और  28 अक्टूबर तक उसके पास भेज दें।

टैरिफ आदेश के मसौदे की खास बातें

  • ब्रॉडकास्टरों को अपने अ ला कार्टे पे-चैनलों का अधिकतम रिटेल मूल्य (एमआरपी) सब्सक्राइबरों के लिए घोषित करना होगा।
  • कोई भी ब्रॉडकास्टर अपने पे-चैनलों के बुक़े की पेशकश और उनके एमआरपी (टैक्स को छोड़कर) की घोषणा सब्सक्राइबरों के लिए कर सकता है। लेकिन, पे-चैनलों के बुक़े का एमआरपी उसमें शामिल अ ला कार्टे पे-चैनलों के एमआरपी के योगफल के 85 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए।
  • चैनलों के एमआरपी पर जॉनर के आधार पर सीमा बांधी जाएगी।
  • ब्रॉडकास्टर ‘प्रीमियम’ चैनल ऑफर कर सकते हैं जिस पर एमआरपी के लिए कोई सीमा नहीं है और ये चैनल केवल अ ला कार्टे आधार पर सब्सक्राइबरों को पेश किए जा सकते हैं।
  • टेलिविज़न चैनलों के डिस्ट्रीब्यूटर को ब्रॉडकास्टर के केवल अ ला कार्टे चैनलों का बुके बनाने की अनुमति मिलेगी। हालांकि, ऐसे पे-चैनलों के बुक़े की रिटेल कीमत, बुके का हिस्सा बनने वाले अ ला कार्टे चैनलों की रिटेल कीमतों की राशि के 85 प्रतिशत से कम नहीं होनी चाहिए।
  • पे-चैनलों और फ्री-टू-एयर चैनलों के बुक़े अलग-अलग होने चाहिए।
  • नेटवर्क की क्षमता और कंटेंट के लिए सब्सक्राइबर द्वारा देय शुल्क अलग-अलग हों।
  • 100 एसडी चैनलों की क्षमता के लिए टेलिविज़न चैनलों के डिस्ट्रीब्यूटर को सब्सक्राइबर द्वारा दिया जाने वाला भुगतान प्रति सेट-टॉप बॉक्स 130 रुपए (टैक्स छोड़कर) के मासिक किराये से ज्यादा न हो।
  • सरकार द्वारा अधिसूचित चैनलों को अनिवार्य रूप से ग्राहकों के लिए उपलब्ध कराने के अलावा 100 एसडी चैनलों की क्षमता के तहत, सब्सक्राइबर कोई भी फ्री-टू-एयर चैनल, पे-चैनल, प्रीमियम चैनल या ब्रॉडकास्टर या टीवी चैनलों के डिस्ट्रीब्यूटरों द्वारा पेश किए जा रहे चैनलों के बुक़े का चयन करने को स्वतंत्र होगा।
  • सब्सक्राइबर को किराये की राशि के अलावा, फ्री-टू-एयर चैनलों या मुफ्त चैनलों के बुके के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।
  • शुरुआती 100 चैनलों की क्षमता के ऊपर अतिरिक्त क्षमता के लिए कोई सब्सक्राइबर 25 एसडी चैनलों के स्लैब का लाभ अधिकतम 20 रुपए प्रति स्लैब में उठा सकता है। यह टैक्स को छोड़कर, प्रति माह प्रति सेट-टॉप बॉक्स के लिए हो।
  • सब्सक्राइबर अपनी पसंद के अ ला कार्टे चैनलों का चुनाव कर सकता है।
  • सब्सक्राइबर को किराये की राशि के अलावा पे-चैनलों या प्रीमियम चैनलों या पे-चैनलों के बुके का भुगतान अलग से करना होगा।
  • टेलिविज़न चैनलों के डिस्ट्रीब्यूटर को कम से कम एक बुके ऑफर करना चाहिए जिसे ‘बेसिक’ सेवा कहा जाए और उसने केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित ‘मस्ट कैरी’ चैनलों समेत 100 फ्री-टू-एयर चैनल शामिल हों।
  • ब्रॉडकास्टर या टीवी चैनलों के डिस्ट्रीब्यूटरों द्वारा ऑफर किए जा रहे किसी भी बुके में एक ही चैनल का एसडी व एचडी वेरिएंट के साथ ही साथ कोई भी प्रीमियम चैनल शामिल नहीं होगा।

 

इंटरकनेक्शन विमियमन के मसौदे प्रमुख प्रस्ताव

  • सभी एड्रेसेबल सिस्टमों यानी, डीटीएच, हिट्स, डैस व आईपीटीवी के लिए समान इंटरकनेक्शन फ्रेमवर्क।
  • सभी एड्रेसेबल सिस्टमों के लिए पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर ‘मस्ट कैरी’ का प्रावधान। टीवी चैनल के डिस्ट्रीब्यूटर को उपलब्ध क्षमता की जानकारी प्रकाशित करनी होगी और कैरेज़ शुल्क के दर की घोषणा करनी होगी।
  • ब्रॉडकास्टर द्वारा उस स्थिति में कोई कैरेज़ शुल्क नहीं दिया जाएगा अगर किसी चैनल का सब्सक्रिप्शन डीपीओ के सब्सक्राइबर आधार के 20 प्रतिशत के बराबर या ज़्यादा हो।
  • कैरेज शुल्क की दर पर प्रति माह प्रति सब्सक्राइबर प्रति चैनल अधिकतम 20 पैसा होगी। साथ ही कैरेज़ शुल्क की राशि सब्सक्रिप्शन में वृद्धि के साथ कम होती जाएगी।
  • डिस्ट्रीब्यूटर कैरेज़ शुल्क पर उतना ही डिस्काउंट दे सकते हैं जो उनके द्वारा घोषित कैरेज़ शुल्क के 35 प्रतिशत से ज्यादा न हो।
  • इंटरकनेक्शन समझौता रेफरेंस इंटरकनेक्शन ऑफर (रियो) की शर्तों के अनुसार किया जाना होगा।
  • ब्रॉडकास्टरों को डिस्ट्रीब्यूटर को अपने पे-चैनलों या पे-चैनलों के बुक़े के अधिकतम रिटेल मूल्य का कम से कम 20 प्रतिशत हिस्सा डिस्ट्रीब्यूशन फीस के रूप में देना होगा। वे अधिकतम रिटेल मूल्य पर छूट भी दे सकते हैं, बशर्ते किसी भी स्थिति में छूट व डिस्ट्रीब्यूशन फीस का जोड़ अधिकतम रिटेल मूल्य के 35 प्रतिशत से ज्यादा न हो।
  • ब्रॉडकास्टरों से सिग्नल पाने के लिए टीवी चैनलों के डिस्ट्रीब्यूटर के लिए आवेदन का मानक फॉर्मैट होगा। टीवी चैनलों के पुन: प्रसारण के लिए डिस्ट्रीब्यूटर से नेटवर्क का उपयोग करने के वास्ते ब्रॉडकास्टरों के आवेदन का भी मानक फॉर्मैट होगा।

क्यूओएस विनियमन के मसौदे के अहम पहलू

  • सभी डिजिटल एड्रेसेबल प्लेटफॉर्मों – डीटीएच, केबल टीवी, आईपीटीवी व हिट्स के वास्ते सेवा की गुणवत्ता (क्यूओएस) और उपभोक्ता के मानक के लिए समान फ्रेमवर्क होगा।
  • सब्सक्राइबरों के लिए अ ला कार्टे चैनलों और चैनलों के बुक़े का सब्सक्रिप्शन चुनने का आसान विकल्प।
  • उपभोक्ता परिसर उपकरण (सीपीई)/ एसटीबी से जुड़ी स्कीमों का सरलीकरण।
  • डीपीओ की वेबसाइट पर ‘कंज्यूमर कॉर्नर’ देकर सेवाओं की आम जानकारी देने के लिए अलग लिंक दिया जाए।
  • सेवा प्रदाताओं द्वारा उपभोक्ता शिक्षण चैनलों का उपयोग करते हुए जन जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए।
  • उपभोक्ता आवेदन फॉर्म (सीएएफ) को आसान बनाना और इलेक्ट्रॉनिक सीएएफ के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना।
  • सब्सक्राइबरों की सेवाएं साल में तीन महीने तक अस्थाई तौर पर रोकी जा सकती हैं।
  • सब्सक्राइब किए गए पैकेज़ों में किसी भी बदलाव के लिए सब्सक्राइबर की सहमति दर्ज करने का अनिवार्य प्रावधान।

सेवा में लंबे और 72 घंटे से ज्यादा के लगातार व्यवधान की स्थिति में उपभोक्ता के हितों की हिफाज़त।