लाइव पोस्ट
चीन में शुरू हुआ दुनिया का सबसे ऊंचा पुल, 14.40 करोड़ डॉलर से बना
नोटबंदी को लेकर तृणमूल कांग्रेस का पीएम मोदी पर कटाक्ष- 'उम्मीद है कल बड़ी घोषणा करेंगे'
सीतापुर में यात्रियों से भरी बस नदी में पलटी, बचाव कार्य जारी
झारखंड में कोयला खदान के अंदर फंसे मजदूर, 10 शव निकाले गए
दिल्ली हाई कोर्ट ने शादियों के लिए बैंक खाते से 2.5 लाख रुपए निकालने के खिलाफ याचिका खारिज़ की
संसद के दोनों सदनों में नोटबंदी के खिलाफ विपक्षी दलों का हंगामा जारी
घोषित काले धन पर लगेगा 50% टैक्स, लोकसभा ने आयकर अधिनियम में संशोधन पास किया

ट्राई ने एमएसओ, एलसीओ में सहमति न बनने पर 55:45 में आय बांटने का प्रस्ताव रखा

मुंबई: भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने मल्टी-सिस्टम ऑपरेटरों (एमएसओ) / हेडएंड-इन-द स्काई (हिट्स) ऑपरेटरों और स्थानीय केबल ऑपरेटरों (एलसीओ) के बीच आम सहमति बन पाने की सूरत में बतौर अंतिम विकल्प सिफारिश की है कि वे आय में 55:45 के अनुपात में हिस्सेदारी कर सकते हैं।

सब्सक्राइबरों द्वारा डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटरों (डीपीओ) को दिए गए किराए की रकम में एलसीओ का एक हिस्सा होगा। उन्हें ब्रॉडकास्टरों द्वारा डीपीओ को दी गई 20 प्रतिशत डिस्ट्रीब्यूशन फीस का भी एक हिस्सा मिलेगा।

इंटरकनेक्शन समझौते का एक अन्य प्रमुख पहलू यह है कि डीपीओ को टीवी चैनलों के सिग्नल भेदभाव रहित आधार पर एलसीओ को उपलब्ध कराने होंगे।

ट्राई द्वारा लाए गए इंटरकनेक्शन रेग्युलेशन के मसौदे की व्यापक रूपरेखा में कहा गया है कि डीपीओ को सब्सक्राइबरों के मिले किराए और ब्रॉडकास्टरों से मिली डिस्ट्रीब्यूशन फीस का 45 प्रतिशत हिस्सा एलसीओ के साथ साझा करना होगा।

ट्राई आय में हिस्सेदारी के इस अनुपात पर उस व्यवस्था को देखते हुए पहुंचा है जो उसने डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (डैस) के अंतर्गत एफटीए (फ्री-टू-एयर) चैनलों के लिए निर्धारित की है। उसने डिस्ट्रीब्यूशन आय में हिस्सेदारी की सुझाव इसलिए दिया है क्योंकि सब्सक्राइबरों से सब्सक्रिप्शन राशि का इकट्ठा करने का काम एलसीओ ही करते हैं।

इसलिए प्राधिकरण ने निष्कर्ष निकाला है कि ब्रॉडकास्टरों से मिली हुई डिस्ट्रीब्यूशन फीस को भी डीपीओ और एलसीओं के बीच उसी अनुपात में साझा किया जाना चाहिए।

ट्राई ने अंतिम विकल्प के तौर पर यह व्यवस्था इसलिए सुझाई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सेवा प्रदाताओं के बीच के झगड़ों के चलते सिग्नल कटने की नौबत न आए।

मसौदा टैरिफ आदेश में ट्राई ने सुझाव दिया है कि डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटरों (डीपीओ) को 100 स्टैंडर्ड डेफिनिशन (एसडी) चैनल उपलब्ध कराने के लिए सब्सक्राइबर से 130 रुपए का किराया शुल्क लेगा। इससे ज्यादा चैनल लेने पर 25 एसडी चैनलों के लॉट या बंडल पर डीपीओ प्रति माह 20 रुपए का अतिरिक्त किराया ले सकता है।

मसौदा टैरिफ आदेश में यह भी कहा गया है कि डीपीओ को ब्रॉडकास्टरों से पे-चैनलों की आय के संग्रह व प्रेषण के लिए 20 प्रतिशत डिस्ट्रीब्यूशन फीस मिलेगी। इस तरह डीपीओ के लिए कैरेज़ फीस से इतर किराया और डिस्ट्रीब्यूशन फीस आय की प्रमुख धाराएं बन गई हैं।

मौजूदा व्यवस्था से विपरीत अब डीपीओ को सब्सक्रिप्शन आय का कोई हिस्सा नहीं मिलेगा क्योंकि सब्सक्राइबर ब्रॉडकास्टरों द्वारा प्रकाशित अधिकतम रिटेल मूल्य (एमआरपी) के आधार पर भुगतान करेंगे।

आय में इस हिस्सेदारी को मानक इंटरकनेक्शन समझौते (एसआईए) के भाग के बतौर डाल दिया गया है जिस पर उस सूरत में अमल किया जाएगा, जब डीपीओ और एलसीओ किसी आपसी सहमति पर नहीं पहुंच पाएंगे।

एमएसओ और एलसीओ को आय में हिस्सेदारी पर बिना किसी बंदिश के आपसी सहमति बनाने की पूरी आज़ादी दी गई है। इस तरह की सहमति को मॉडल इंटरकनेक्शन समझौता (एमआईए) कहा गया है।

एमआईए में इस तरह का लचीलापन भी दिया गया है कि ट्राई द्वारा निर्धारित किसी क्लॉज को हटाए या बदले बिना अतिरिक्त क्लॉज़ जोड़े जा सकते हैं। एमआईए में बिलिंग दोनों पक्षों के हुई सहमति के हिसाब के एमएसओ या एलसीओ के नाम में हो सकती है।

लेकिन एसआईए में बिलिंग एमएसओ के ही नाम में होगी। उसमें ट्राई ने अंतिम विकल्प के रूप में आय में हिस्सेदारी का अनुपात तय करने के अलावा एमएसओ व एलसीओ की ज़िम्मेदारियां भी बांट दी हैं।

एसआईए में एलसीओ को उपभोक्ता-केंद्रित ज़िम्मेदारियां दी गई हैं, जबकि एमएसओ को वो ज़िम्मेदारियां दी गई हैं जिनका सीधा संबंध सब्सक्राइबर की बिलिंग समेत एसएमएस (सब्सक्राइबर मैनेजमेंट सिस्टम) से है।

एमएसओ व एलसीओ के बीच के इंटरकनेक्शन समझौते अन्य प्रमुख पहलू

ट्राई ने सुझाव दिया है कि डीपीओ और एलसीओ के बीच हुए इंटरकनेक्शन समझौते में दोनों पक्षों द्वारा दी जा रही विभिन्न सेवाओं और एक पक्ष द्वारा दूसरे पक्ष से लिए जा रहे शुल्क का पूरा ब्यौरा होना चाहिए।

डीपीओ और एलसीओ के बीच हुए इंटरकनेक्शन समझौते में स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि ट्राई द्वारा समय-समय पर जारी किए गए सेवा की गुणवत्ता (क्यूओएस) संबंधी नियमन के अनुरूप हर पक्ष की भूमिका और जिम्मेदारी क्या है।

डीपीओ लिखित इंटरकनेक्शन समझौता किए बिना एलसीओ को सिग्नल नहीं उपलब्ध करा सकते। इसी तरह, एलसीओ डीपीओ के साथ लिखित इंटरकनेक्शन समझौता किए बगैर किसी ब्रॉडकास्टर के टीवी चैनलों के सिग्नल किसी सब्सक्राइबर तक री-ट्रांसमिट नहीं कर सकते।

डीपीओ को एलसीओ से लिखित अनुरोध मिलने के 30 दिनों के भीतर उसे एमआईए के अनुरूप सिग्नल उपलब्ध करा देने होंगे। अगर आपसी वार्ता विफल हो जाती है तो दोनों पक्षों में आपस में एसआईए पर हस्ताक्षर करने होंगे।

डीपीओ मौजूदा इंटरकनेक्शन समझौते की समाप्ति की तारीख से कम से कम 60 दिन पहले एलसीओ को नया लिखित इंटरकनेक्शन समझौता करने का नोटिस देना होगा। डीपीओ को अपने मौजूदा इंटरकनेक्शन समझौते की समाप्ति की तारीख से 15 दिन पहले सब्सक्राइबरों को उसके खत्म होने की तारीख की सूचना देनी होगी।

कभी-कभी एलसीओ अपने संबद्ध एमएसओ से अलग हो जाते हैं, जब वे इन एमएसओ को उनका बकाया चुकाने में या तो असमर्थ या अनिच्छुक रहते हैं। इसका नतीजा उनसे जुड़े एमएसओ के डूबत ऋणों के रूप में सामाने आता है और एमएसओ ब्रॉडकास्टर को एलसीओ के हिस्से का बकाया देने में असमर्थ रहते हैं। वैसी स्थिति में ब्रॉडकास्टर भी एमएसओ से बकाया रकम नहीं वसूली पाते।

दूसरी तरफ होता यह है कि नियमित रूप से इनवॉयस या चालान न दिए जाने के कारण एलसीओ को अचानक भारी बकाया रकम चुकाने की स्थिति का मुकाबला करना पड़ता है जिसे चुकाने के लिए उनके पास कोई ज़रिया नहीं होता।

ट्राई के मुताबिक, अगर यह सुनिश्चित कर दिया जाए कि एलसीओ को हर महीने चालान जारी किया जाएगा जिसमें साफ तौर पर पिछला बकाया और मौजूदा देय राशि का उल्लेख हो तो यह समस्या सुलझाई जा सकती है। ऐसी स्थिति में अगर कोई एलसीओ नए एमएसओ को पकड़ना चाहता है तो नवीनतम चालान में स्पष्ट रूप से दिया रहेगा कि एलसीओ पर बकाया रकम की क्या स्थिति है।

एलसीओ को उस हालत में किसी डिस्ट्रीब्यूटर के भुगतान का डिफ़ॉल्टर नहीं माना जाना चाहिए अगर वो बकाया चुकाने के प्रमाण के रूप में ठीक पिछली तीन तिमाहियों के चालान और भुगतान की रसीद की प्रतियां उपलब्ध करा देता है। इस तरह की शर्त से एलसीओ का अपने ऊपर अचानक डाल दी गई अन-अपेक्षित व अप्रत्याशित बकाया से भी बचाव हो जाएगा। इसे ध्यान नें रखते हुए ट्राई ने नियमन में उपयुक्त प्रावधान किए हैं।

ट्राई ने कहा कि डैस व हिट्स सेवाओं में अंतिम कड़ी की कनेक्टिविटी ज्यादातर एलसीओ द्वारा प्रदान की जाती है। सरकार द्वारा जारी लाइसेंस के दिशानिर्देशों के संदर्भ में, एलसीओ भी आईपीटीवी सेवा प्रदाताओं के लिए अंतिम कड़ी की कनेक्टिविटी प्रदान कर सकते हैं। किसी डीपीओ और एलसीओ के बीच कुशल इंटरकनेक्शन व्यवस्था सब्सक्राइबरों के लिए सेवाएं प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

एलसीओ, सब्सक्राइबरों के लिए सेवा की गुणवत्ता नियमों की मूल्य श्रृंखला में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मूल्य श्रृंखला में किसी भी अन्य इकाई की तरह ही एलसीओ भी पंजीकृत सेवा प्रदाता रहे हैं।

केबल टीवी एक्ट और उसके तहत नियमों के अनुसार, एलसीओ अपने संचालन क्षेत्र के हेड पोस्ट ऑफिस में पंजीकृत होते हैं।

ट्राई का कहना कि डीपीओ व एलसीओ के बीच इंटरकनेक्शन व्यवस्था पर भी गैर-विशिष्टता, अनिवार्य रूप से चैनल देने, गैर-भेदभाव, लिखित समझौता और प्रतिस्पर्धा व समानता को बढ़ावा देने के लिए समयबद्ध तरीके से सिग्नल देने के मूलभूत सिद्धांत लागू होते हैं। इनके पालन से ही सब्सक्राइबर को अच्छे स्तर की टीवी सेवाएं प्रतिस्पर्धी दाम पर उपलब्ध कराई जा सकती हैं।