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टीवी चैनलों की प्रवेश बाधा मिटाने के लिए ट्राई ने ‘मस्ट कैरी’ प्रावधान पेश किया

मुंबई: भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने कैरेज़ शुल्क पर प्रति माह प्रति सब्सक्राइबर प्रति चैनल 20 पैसे की सीमा बांधने के साथ ही डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटरों (डीपीओ) के लिए ‘मस्ट कैरी’ के प्रावधान का भी प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव उसने केबल, डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच) व हेडएंड-इन-द-स्काई (हिट्स) सेवा प्रदाताओं पर लागू होनेवाले नए इंटरकनेक्शन विनियमन में प्रस्तुत किया है।

इस प्रस्ताव का मुख्य मकसद टेलिविज़न चैनलों की प्रवेश बाधाओं को दूर करना है। ब्रॉडकास्टर लंबे समय से उस ‘मस्ट प्रोवाइड’ प्रावधान की तरह ‘मस्ट कैरी’ प्रावधान लाने की मांग करते रहे है जो कहता है कि ब्रॉडकास्टरों को अपने चैनल डीपीओ को बगैर किसी भेदभाव के उपलब्ध कराने होंगे।

ट्राई ने हाल ही में दूरसंचार (प्रसारण व केबल सेवाएं) इंटरकनेक्शन (एड्रेसेबल सिस्टम) विनियमन, 2016 का मसौदा जारी किया है। इसी में उसने सभी एड्रेसेबल सिस्टम के लिए पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर ‘मस्ट कैरी’ का प्रस्ताव पेश किया है।

विनियमन के अनुसार, डीपीओ को उपलब्ध क्षमता समेत अपने प्लेटफॉर्म के बारे में सारी जानकारियां प्रकाशित करनी पड़ेगी और कैरेज़ शुल्क की दरों की घोषणा करनी होगी।

गिरेगी गाज़ 5% से कम सब्सक्राइबर आधार वाले चैनलों पर 

डीपीओ के पास सीमित क्षमता होती है, इसे ध्यान में रखते हुए ट्राई ने डीपीओ को छूट दे दी है कि अगर प्रासंगिक इलाके में किसी चैनल का मासिक सब्सक्रिप्शन लगातार पिछले ठीक छह महीनों में उसके सब्सक्राइबर आधार के 5 प्रतिशत से कम रहा है तो वो चाहे तो उसे कैरी करना बंद कर सकता है।

अगर कोई नेटवर्क आवश्यक सब्सक्रिप्शन स्तर नहीं बनाए रख पाता तो डीपीओ उसे एक साल तक के लिए अपना मंच देने से मना कर सकता है। इस तरह के इनकार को ‘मस्ट कैरी’ के प्रावधान का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।

ट्राई की दलील है कि यह सुनिश्चित करेगा कि अलोकप्रिय चैनल डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क पर कीमती जगह घेरकर न बैठे रहें। साथ ही यह भी सुनिश्चित करेगा कि किसी खास बाज़ार में लोकप्रिय चैनल डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में क्षमता की दिक्कत होने के बावजूद बने रहें। यह नए चैनलों के लिए जगह पैदा करेगा जिन्हें वेटिंग लिस्ट में उसकी पोजिशन के हिसाब से एक्सेस दी जा सकती है।

ट्राई के मुताबिक, कंटेंट को नेटवर्क से निरपेक्ष होना चाहिए और नेटवर्क को भी कंटेंट से निरपेक्ष होना चाहिए।

डीपीओ द्वारा क्षमता की घोषणा

नेटवर्क की भेदभाव रहित पहुंच सुनिश्चित करने के लिए ट्राई ने सुझाव दिया है कि डीपीओ को पारदर्शी रूप से अपनी वेबसाइट पर अपने नेटवर्क की चैनल कैरी करने की क्षमता, उपलब्ध चैनलों की सूची, अतिरिक्त क्षमता अगर हो तो, और ऐसे चैनलों की सूची जिनके अनुरोध री-ट्रांसमिशन के लिए नेटवर्क के उपयोग के लिए ब्रॉडकास्टरों के पास लंबित हों, रखनी चाहिए।

प्राधिकरण ने कहा नेटवर्क की क्षमता और इसकी उपलब्धता या प्रतीक्षा सूची की ऐसी घोषणा से नए चैनलों के लिए प्रवेश बाधाएं दूर होंगी और सब्सक्राइबरों को चैनलों का चुनाव करने को मिलेगा।

ट्राई ने कहा है कि नेटवर्क का उपयोग चैनलों को कैरी करने की क्षमता पर और लागू कैरेज शुल्क के भुगतान पर पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर प्रदान किया जाना चाहिए।

मस्ट कैरी और मस्ट प्रोवाइड का उल्लंघन करती पूर्व शर्तें

ट्राई ने सुझाव दिया कि सेवा प्रदाता, चाहे वह ब्रॉडकास्टर हों या डीपीओ, किसी भी हालत में टीवी चैनलों के सिग्नल देने या प्लेटफॉर्म का उपयोग करने से पहले, कोई शर्त नहीं थोपनी चाहिए, क्योंकि इस तरह की शर्तें ‘मस्ट कैरी’ और ‘मस्ट प्रोवाइड’ के सिद्धांतों का उल्लंघन करती है।

प्राधिकरण ने ऐसी भी स्थितियों को परिभाषित किया है जो अनुचित मानी जा सकती हैं। एक चैनल को इलेक्ट्रॉनिक प्रोग्राम गाइड (ईपीजी) में किसी भी निर्दिष्ट स्थिति में रखने या चैनल को एक विशेष नंबर दिए जाने की पूर्व शर्तों से डिस्ट्रीब्यूटर के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं क्योंकि किसी चैनल के पैकेजिंग और प्लेसमेंट का विशेषाधिकार डीपीओ का होता है।

इंटरकनेक्शन समझौते में पार्टियों को ऐसे खंड नहीं रखने चाहिए जिसके तहत प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से डीपीओ के लिए किसी बुके में पे चैनलों को या पे चैनलों के बुके को रखना ज़रूरी हो, इससे उपभोक्ता का चयन प्रभावित हो सकता है।

हालांकि, प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि पार्टियां रियो में बताए गए मापदंडों के आधार पर एक चैनल के लिए एक विशेष नंबर के आवंटन के लिए छूट प्रदान कर सकती हैं।

इसी तरह, री-ट्रांसमिशन के लिए एक डिस्ट्रीब्यूटर द्वारा अपने नेटवर्क के लिए पहुंच प्रदान करने के समय एक न्यूनतम गारंटी अवधि के लिए पूर्व शर्त या चैनलों की एक न्यूनतम संख्या की शर्त, प्रतियोगिता के लिए प्रतिकूल हो सकती है और इससे नए चैनलों के लिए प्रवेश की और बाहर निकलने की दोनों तरह की अड़चने पैदा होती है।

हालांकि, डिस्ट्रीब्यूटर रियो के तहत ज़्यादा संख्या में चैनलों को कैरी करने या लंबे समय के इंटरकनेक्शन समझौते के लिए ब्रॉडकास्टर को कैरेज शुल्क की दर पर छूट की पेशकश कर सकते हैं।

एलसीओ को बिना भेदभाव सिग्नल

ट्राई ने कहा कि एमएसओ को बिना भेदभाव के एलसीओ को टीवी चैनलों के सिग्नल प्रदान करने चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे ब्रॉडकास्टर के लिए डीपीओ को टीवी चैनलों के सिग्नल ‘मस्ट प्रोवाइड’ करना आवश्यक है।

एक ब्रॉडकास्टर और एक डीपीओ के बीच एक अनन्य समझौता निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और क्षेत्र के विकास को प्रभावित कर सकता है। एक ब्रॉडकास्टर या एक एलसीओ के साथ एक डीपीओ की कोई व्यवस्था जो अन्य ब्रॉडकास्टर या अन्य एलसीओ को री-ट्रांसमिशन के लिए डीपीओ के नेटवर्क का उपयोग करने से रोकती है या टीवी चैनलों के सिग्नल प्राप्त करने से रोकती है, वह प्रतियोगिता के प्रतिकूल हो सकती है। इसलिए, ट्राई का मानना है कि टीवी चैनलों के डिस्ट्रीब्यूशन में किसी भी तरह की अनन्यता प्रतियोगिता के लिए हानिकारक है और इसलिए इसकी अनुमति नहीं है।