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डैस से बाहर के इलाकों में केबल टीवी के लिए ट्राई ने पेश किया टैरिफ ऑर्डर का नया ड्राफ्ट

मुंबई: भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने उन केबल टीवी ऑपरेटरों को प्रेरित और प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव रखा है जो सरकार द्वारा अधिसूचित कट-ऑफ तारीख से पहले डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (डैस) को लागू कर रहे है।

जो केबल नेटवर्क एनालॉग सिस्टम की समाप्ति की तारीख से पहले डैस को अपना लेंगे, उन पर एड्रेसेबल सिस्टम या डैस के लिए निर्धारित टैरिफ ऑर्डर ही लागू होगा।

लेकिन इस सेवा प्रदाताओं को केबल टेलिविडन नेटवर्क्स (रेग्युलेशन) एक्ट और उसके तहत बनाए गए नियमों के हिसाब से अपना पंजीकरण कराना होगा और डिजिटल एड्रेसेबल केबल टीवी सिस्टम लगाना होगा।

ट्राई का मानना है कि ऐसे सेवा प्रदाताओं के लिए टैरिफ ही नहीं, इंटरकनेक्शन व सेवा का गुणवत्ता (क्यूओएस) से संबंधित नियामक आवश्यकताएं वहीं होंगी जो डैस के इलाकों में दी जा रही केबल टीवी सेवाओं पर लागू होती हैं।

ट्राई ने टैरिफ ऑर्डर का एक नया प्रारूप ‘टेलिकम्युनिकेशन (ब्रॉडकास्टिंग एंड केबल) सर्विसेज़ (सेवेन्थ) (नॉन-एड्रेसेबल सिस्टम्स) टैरिफ ऑर्डर 2014 (ड्राफ्ट)’ के नाम से पेश किया है। यह ज्यादातर पिछले प्रारूप जैसा ही है।

गैर-डैस इलाकों में केबल टीवी सिस्टम के लिए ट्राई को अपना नया टैरिफ ऑर्डर सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय अंतिम तारीख के मद्देनज़र लाना पड़ा है।

एनालॉग केबल सिस्टम के लिए प्रस्ताविक टैरिफ ऑर्डर के इस प्रारूप की कुछ प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:

  • थोक टैरिफ को नियमित करनेवाली मौजूदा प्रणाली चालू रहेगी;
  • नए पे-चैनलों और फ्री-टू-एयर चैनल (एफटीए) से पे-चैनल बनाए गए चैनलों की दर ब्रॉडकास्टर वर्तमान समानता सिद्धांत के हिसाब से तय करेंगे;
  • ब्रॉडकास्टरों को अपने सभी चैनल अनिवार्य रूप से अ ला कार्टे आधार पर देने होंगे; बॉडकास्टरों को अतिरिक्त बुक़े पेश करने की भी आज़ादी रहेगी;
  • ऑपरेटरों के बीच आय में हिस्सेदारी आपसी बातचीत से तय होगी;
  • रिटेल टैरिफ के नियमन के लिए अखिल भारतीय स्तर पर दर की अधिकतम सीमा के साथ तीन स्लैब बनाए गए हैं। ये स्लैब ऑपरेटर द्वारा दिए जा रहे पे और एफटीए चैनलों की संख्या पर आधारित हैं;
  • ऑपरेटर सब्सक्राइब की गई केबल टीवी सेवाओं का बिल व रसीद ग्राहक को उपलब्ध कराएंगे।

 पृष्ठभूमि

सुप्रीम कोर्ट ने 19 सितंबर को न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) द्वारा दाखिल एक हस्तक्षेप याचिका पर सुनवाई के बाद ट्राई से कहा था कि वो 31 दिसंबर तक वह गैर-एड्रेसेबल इलाकों यानी डैस के इतर इलाकों के लिए एक नया टैरिफ ऑर्डर पेश कर दे। इस हस्तक्षेप याचिका में ब्रॉडकास्टरों द्वारा मल्टी सिस्टम ऑपरेटरों (एमएसओ) को दी जानेवाली कैरेज फीस और प्लेसमेंट फीस पर सीमा बांधने की मांग की गई है।

कोर्ट ने 2010 में ट्राई द्वारा दायर एक रिपोर्ट पर भी ब्रॉडकास्टरों से टिप्पणियां मांगी थीं। साथ ही उसने एनबीए की याचिका के बाद ट्राई को भी निर्देश दिया था कि वह कैरेज फीस व प्लेसमेंट फीस पर सीमा बांधने की व्यावहार्यता का अध्ययन करे।

ट्राई ने टैरिफ तय करने का काम पूरा करने के बाद 21 जुलाई 2010 को अपनी रिपोर्ट के हिस्से के रूप में प्रस्तावित टैरिफ ऑर्डर पेश कर दिया।

नियामक संस्था ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए सभी हितधारकों की राय व सुझाव प्रारूप टैरिफ ऑर्डर पर 15 दिसंबर तक मांगे थे।

टैरिफ की थोक दर

प्रारूप के मुताबिक, ब्रॉडकास्टरों को सामान्य केबल सब्सक्राइबर द्वारा केबल ऑपरेटर या एमएसओ को दिए जानेवाले अधिकतम शुल्क की सीमा के भीतर चैनलों व बुक़े की दरें साफ-साफ बतानी होंगी।

हर ब्रॉडकास्टर को अपने सभी पे-चैनल अ ला कार्टे आधार पर देने होंगे। इसमें किसी पे-चैनल की अ ला कार्टे दर इस ऑर्डर के लागू होने से ठीक पहले चल रही उसकी दर से अधिक नहीं हो सकती।

साथ ही, अगर कोई ब्रॉडकास्टर पे-चैनलों को केवल पे-चैनलों के बुक़े या पे व एफटीए दोनों के बुक़े के हिस्से क बतौर दे रहा है तो उसे अपने चैनलों के हर बुक़े की दर बतानी होगी।

लेकिन, ट्राई ने यहा भी स्पष्ट किया है कि चैनलों के बुक़े के लिए ब्रॉडकास्टर द्वारा निर्धारित की जानेवाली दर इस ऑर्डर के अमल में आने से ठीक पहले उस बुक़े की दर से अधिक नहीं हो सकती। साथ ही, इस ऑर्डर के अमल में आने से पहले जो बुक़े थे और जो इस पर अमल के बाद बनाए गए, दोनों ही मामलों में चैनलों के बुक़े की दर और उसके बुके में शामिल पे-चैनलों की दरों को कुछ शर्तों का पालन करना होगा।

ये शर्तें इस प्रकार हैं:

  1. उस बुक़े के शामिल पे-चैनलों की अ ला कार्टे दरों का जोड़ किसी भी सूरत में उस बुक़े की कुल दर के डेढ़ गुने से ज्यादा नहीं होनी चाहिए;
  2. उस बुके में शामिल हर पे-चैनल की अ ला कार्टे दर पूरे बुक़े में पे-चैनलों की औसत दर के तीन गुने से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

एमएसओ और एलसीओ में आपसी समझौता

ट्राई ने कहा है कि केबल ऑपरेटर द्वारा एमएसओ को दिए जानेवाले प्रभार का फैसला केबल ऑपरेटर और एमएसओ की आपसी सहमति से किया जाएगा।

ज़रूरी होगा दिखाना

प्रारूप के मुताबिक केबल टेलिविज़न नेटवर्कों के लिए केबल टेलिविज़न नेटवर्क्स (रेग्युलेशन) एक्ट, 1995 के अनुच्छेद 8 के तहत दूरदर्शन के चैनलों समेत कम से कम 30 एफटीए चैनलों को ट्रांसमिट या रीट्रांसमिट करना अनिवार्य होगा।

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