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कलर्स के ‘चक्रवर्ती अशोक सम्राट’ की अंदरूनी झलक

“इतिहास के पन्नों में सैकड़ों-हज़ारों सम्राटों के नाम के बीच… अशोक का नाम अलग से चमकता है और एक अकेले सितारे की मानिंद चमकता है।” – एच जी वेल्स

ashoka-1-300x168महान ब्रिटिश इतिहासकार के इन शब्दों ने दुनिया के इतिहास में अशोक की जगह सार-संक्षेप में कह डाली है। हम भारतीयों के लिए मौर्य वंश का यह राजा इतिहास में किसी अकेले सितारे से कहीं ज़्यादा है। वे भारतीयता का एक सर्वोत्कृष्ट उदाहरण हैं। कलाकृतियों, दस्तावेजों और अवशेषों के माध्यम से उनके नैतिक-दार्शनिक शिलालेख भारतीय चेतना में व्याप्त हैं।

इसलिए, यह सहज है कि इस प्राचीन राजा की कहानी कहने का प्रयास भी भव्य होना चाहिए। 2001 में, संतोष सिवान की फिल्म ‘अशोका’ ने हमें भव्यता का स्वाद चखाया था, पर अन्यथा यह त्रुटिपूर्ण थी। हिन्दी के सामान्य मनोरंजन चैनल (जीईसी) कलर्स ने जब ‘चक्रवर्ती अशोक सम्राट’ में अशोक के जीवन और युग को ड्रामा में बदलने का फैसला किया है तो उसने सिवान की फिल्म की तरह अतिरेकपूर्ण और सस्ती भव्यता से बचते हुए ऐतिहासिक वैभव को फिर से बनाने की चुनौती स्वीकार की।

कलर्स काफी समय से ऐतिहासिक जॉनर में एक कहानी की तलाश में था। इस सीरीज़ पर काम डेढ़ साल पहले तब शुरू हुआ जब कोन्टिलो प्रोडक्शंस के सीईओ अभिमन्यु सिंह ने चैनल के सामने यह आइडिया रखा।

 परदे के पीछे का हाल

  • एक बार ऐसा हुआ कि राजा बिंदुसार की भूमिका निभा रहे कलाकार के आभूषण उसके शरीर से तब गिर गए जब वो जंगल में घुड़सवारी कर रहा था।
  • बुज़कशी (घोड़ों पर सवार होकर खेले जानेवाला पारंपरिक खेल) की एक सीक्वेंस जैसलमेर में शून्य डिग्री तापमान पर शूट की गई! अभिनेताओं ने अपनी कास्ट्यूम पहन रखी थी। लेकिन एक भयंकर बर्फानी तूफान ने सब कुछ उड़ा दिया तो उन्हें शूटिंग पूरी करने के लिए अगले दिन वापस आना पड़ा।

 

सिंह ने टेलिविज़न पोस्ट को बताया, “यह आइडिया हमारे बीच हमेशा से रहा है क्योंकि यह हमारे इतिहास का हिस्सा है। अब तक हमारे देश के लिए लड़ने वाले लोगों के बारे में मैंने कहानियां कही हैं। यह (‘चक्रवर्ती अशोक सम्राट’) उस आदमी की कहानी है जिसने इस देश को बनाया और अंतर यहीं निहित है।”

पहला कदम शोध, पटकथा और संवाद पर काम करने के लिए सही टीम खोजना था। कलर्स के सीईओ राज नायक के अनुसार, इस शो को विकसित करने में समय लग गया क्योंकि कैमरे के पीछे के चेहरे कई बार बदले गए। उन्होंने कहा, “लेकिन अब हमें सबसे अच्छी कास्ट और टीम मिल गई है।”

ashoka-300x200प्रारंभिक एपिसोड की शोध में मदद करने के लिए अशोक बैंकर आए और श्रीकांत शर्मा ने शोध टीम का नेतृत्व किया।

शोधकर्ताओं की टीम ने कहानी को समझने के लिए कई किताबें, स्तोत्र और ऐतिहासिक दस्तावेजों को छान मारा।

सिंह ने विस्तार से बताया, “कोई भी किताब घटनाओं के मिनट-दर-मिनट विवरण नहीं देती। इसलिए, व्यापक शोध और थोड़े-से नाटकीय रूपांतरण के साथ, हम तथ्य और कल्पना का एक मज़बूत मिश्रण बनाने में कामयाब रहे। सम्राट के बारे में अधिकांश प्रतिलिपियां पाली में थी और अंग्रेज़ों ने श्रीलंका से इसे मंगवाया था।”

सिर्फ कहानी बनाने में ही आधा साल लग गया। टीम ने श्रीलंका के इतिहास से लेकर ग्रीक साहित्य तक बहुत कुछ पढ़ डाला। अशोक के जीवन में डॉट्स कनेक्ट करने में उन्हें सबसे ज़्यादा मदद मिली चाणक्य के ‘अर्थशास्त्र’ से।

उन्होंने कहा, “अशोक के बचपन के बारे में ‘अर्थशास्त्र’ में और अन्य स्रोतों में ज़्यादा जानकारी नहीं थी। ऐतिहासिक वृत्तांत के अंदर छिपी जानकारी निकाल लाना शोध के दौरान सबसे बड़ी चुनौती थी। चंद्रगुप्त मौर्य ने एक ग्रीक राजदूत की मेजबानी की थी जो सेल्यूकस निकेटर के साथ जुड़ा था। इसलिए श्रीलंकाई इतिहासकारों के अलावा ग्रीक इतिहासकारों को भी मैंने पढ़ा।”

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अशोक की कहानी के विभिन्न संस्करण हैं। कुछ किताबें राजा के बुरे पक्ष को दिखाते हुए उन्हें ‘चंड अशोक’ कहती हैं। हालांकि, सभी पुस्तकों में उनका अपनी मां के प्रति प्रेम और सिंहासन पर आसीन होना स्पष्ट रूप से उल्लिखित है।

सिंह ने कहा, “इतिहास और कल्पना का ऐसा मिश्रण होना चाहिए कि लोग तुरंत कहानी के साथ कनेक्ट हो जाएं। कोई भी किताब हज़ारों साल पहले की मूल बातचीत नहीं दे सकती। सब कुछ कहानी कहने के ढ़ंग पर निर्भर है। एक निर्माता के रूप में मुझे इतिहास को अपने तरीके से व्याख्यित करने की स्वतंत्रता है।”

 शो के लिए पढ़ी गई कुछ किताबें

  • राधा कुमुद मुखर्जी की ‘चंद्रगुप्त मौर्य एंड हिज टाइम्स’
  • आनंद डब्ल्यूपी गुरुग की ‘महावाम्स: एन्नोटेड न्यू ट्रांसलेशन विद प्रोलेगोमेना’
  • फो-क्वो-की की ‘रिकॉर्ड ऑफ बुद्धिस्टिक किंगडम्स ऑर ट्रैवेल्स ऑफ फा-हियान’
  • प्लूटार्क की ‘लाइफ ऑफ अलेक्जैंडर’
  • पीएचएल एगरमोंट की ‘द क्रोनोलॉज़ी ऑफ रेन ऑफ अशोक मोरिया’

 

एक और पहलू जिसे जटिल डिजाइन की ज़रूरत थी वह मौर्य साम्राज्य के राज्य का सेट था। इस सेट को डिजाइनर ओमंग कुमार और नितिन देसाई ने बनाया है।

आप जब सेट पर घूमते हैं तो आपको पता चलता है कि चट्टानों को काटकर इसका आर्कीटेक्चर बनाने में कितनी बारीकी से काम किया गया है। कर्जत में एनडी स्टूडियो में इस सेट को बनाने में तीन महीने से ज़्यादा का समय लग गया और यहां सेट में एक विशाल आंगन और एक शाही अदालत शाही शान की झलक देते हैं।

अदालत में, सबसे शानदार विशेष रूप से खुदा सिंहासन है। सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के रूप में शो में एक प्रतीकात्मक भूमिका निभाने वाला शेर सिंहासन पर खुदा हुआ है। यह सैंडस्टोन, मिट्टी, काला पत्थर और नकली सोने से बना है।

आंगन के दूसरी ओर मौर्य युग में हमें ले जाता हुआ मगध का बाज़ार है। मैं मिट्टी के बर्तन बनाते हुए प्राचीन कुम्हारों, चूड़ीहार, तलवार और ढाल बेचने वाले और मसालों की दुकानों से गुज़रती चली गई।

सेट में उल्लेखनीय है चाणक्य का आश्रम और रानियों का अलग रनिवास।

Ashoka-2-300x225विवरण पर रोशनी डालते हुए सिंह ने कहा, “सेट का निर्माण काम अभी भी चालू है। कर्जत में कई अच्छी आउटडोर जगहें हैं। ओमंग ने वाकई बेहतरीन डिज़ाइन बनाई है और इसे उतने ही बेहतरीन ढ़ंग से नितिन द्वारा निर्मित किया है।”

13 से 15 घंटे तक चलने वाले शूटिंग कार्यक्रम के साथ, टीम ने कर्जत में ही फिलहाल घर बना लिया है। टीम बाद के दृश्यों को शूट करने के लिए नई जगहों की खोज कर रही है।

अशोक के जीवन की युगांतरकारी घटना थी कलिंग का युद्ध, जिसने उसके जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया। हालांकि सीरियल की कहानी सम्राट अशोक के जीवन के इस निर्णायक मोड़ से अभी काफी दूर है, फिर भी सिंह और उनकी टीम ने हाल ही में कलिंग का दौरा किया ताकि उस ऐतिहासिक स्थल का मौका-मुआयना किया जा सके जो आज के ओडिशा राज्य का हिस्सा है।

सिंह बताते हैं, “हमने अभी तक कलिंग युद्ध के सीक्वेंस की योजना नहीं बनाई है। लेकिन, हमने हाल ही में ओडिशा में उस जगह की यात्रा की, जहां यह युद्ध हुआ था। इस इलाके में धाऊली का शांति स्तूप पड़ता है और यह दया नदी से सटा हुआ है। धाऊली पहाड़ी को युद्ध की वास्तविक जगह माना जाता है। किंवदंती है कि नदी किनारे की मिट्टी कलिंग युद्ध में बहे खून के कारण लाल हो गई है। हैरानी की बात है कि यहां का भूभाग उस इलाके जैसा है जहां हम इस समय [कर्जत] शूटिंग कर रहे हैं। हम पहले इस घटना की शूटिंग की योजना बनाएंगे और जगह का फैसला बाद में करेंगे।”

शुरुआती एपिसोडों के लिए व्यापक आउटडोर शूटिंग थार रेगिस्तान जैसी जगहों में की गई। सिंह बताते हैं कि रेगिस्तान की चरम गर्मी ने कलाकारों और क्रू के लोगों के लिए गंभीर समस्याएं पैदा कर दी थी। टीम ने केरल के वॉटरफॉल्स में भी शूटिंग की है।

रिसर्च ने निखत नीरुशा को हर चरित्र के व्यक्तित्व पर आधारित कास्ट्यूम और आभूषण डिजाइन करने में मदद की। प्रोडक्शन हाउस ने कुछ परीक्षणों के बाद जैसे ही उन्हें अंतिम रूप दिया, उन्होंने कास्ट्यूम का स्केच बना डाला।Ashoka-1-300x224

सही कास्ट को चुनना भी एक अग्नि परीक्षा थी। सिंह कहते हैं, “हमने कास्टिंग पर काफी समय और ऊर्जा लगाई। युवा अशोक के चरित्र [जिसे सिद्धार्थ निगम ने निभाया है] के लिए, हमने व्यापक ऑडिशन किया। हमने इस भूमिका के लिए सिद्धार्थ को चुना, जबकि पांच अन्य लड़कों ने भी इसके लिए ऑडिशन दिया था।”

युवा अशोक का किरदार निभानेवाले सिद्धार्थ निगम को अपनी भूमिका की तैयारी के लिए कठोर प्रशिक्षण से गुजरना पड़ा। इस बाल कलाकार का कहना है, “मुझे घुड़सवारी, तलवार और व्यवहार के विकास में विशेष पाठ के लिए पिछले कुछ महीनों में कठोर प्रशिक्षण से गुजारा गया है।”

निदेशक प्रसाद गवंडी के लिए शूटिंग का काम भी कोई आसान नहीं रहा। वे कहते हैं, “कास्ट्यूम ड्रामा के लिए शूटिंग करना मुश्किल है। कास्ट को तैयार करने और दृश्यों के बीच में कास्ट्यूम को एडजस्ट करने में काफी समय लगता है। इसमें बहुत सारे धैर्य की ज़रूरत पड़ती है क्योंकि कलाकारों के लिए इतने भारी कास्ट्यूम में घूमना-फिरना बहुत कठिन है। इसलिए, हम हर शॉट के लिए दो कैमरों का इस्तेमाल करते हैं। सीन को विजुअलाइज़ करने में वक्त लगता है, लेकिन मज़ा भी आता है।”

इसी तरह का मज़ा मुझे कास्ट, क्रू और प्रोडक्शन हाउस के सदस्यों की आंखों में झलकता नज़र आया। यही वह आनंद है जो उन्हें अथक रूप से काम करने और ‘चक्रवर्ती अशोक सम्राट’ की कहानी को फिर से रचने में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करने की प्रेरणा देता है।